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Love shayeri bewafa shayeri dard bhri shayeri lavitaye kahaniya motivsnal or samajik stori

Kisi ka jhukne n dena sis lachari me

किसी का झुकने न देना सीस लाचारी में बेमानी का सीस उठने न देना खून है तुम्हारी नसों में ईमान का  इसे बेमानो से मिटने न देना  बाहें तुम्हारी भी कमजोर नहीं आजमाकर देख उठा लेना बेसख अस्तर शस्त्र रण भूमि में  पुरखों का गौरव फुजदिलो की तलवारों से मिटने न देना उठा है सीना तुम्हारे अपनो का नेकि पर चलकर  कु कर्मों से इसे मिटने न देना जब बात बन आए इजत पर बलिदान होना पड़े होजना चमन इज्जत का संजोया है तुम्हरे पुरखों ने खून पसीना बहाकर खुद मिट जाना पर इज्जत को कभी मिटने न देना किसी का झुकने न देना सीस लाचारी में बेमानी का सीस उठने न देना  कमजोर का बनना सहारा मुस्किल हालातों में  बलशाली की धौंस पनपने न देना खून है तुम्हारी नसों में ईमान का  इसे बेमानो से मिटने न देना                                              ✍️रामरतन सुड्डा

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हम बहुजन हैं बहुजन ही हमारा धर्म होना चाइए क्यों पहचाने कोई हमे हिंदू से जिसने हमे कुछ नहीं दिया सिवाए यातनाओं के हम शुद्र थे शुद्र है शुद्र से ही हमे पहचाना जाना चाहिए हम बहुजन हैं बहुजन ही मेरा धर्म होना चाइए हिंदू तो आज भी करलेते नफरत हमसे, और आज भी ख्वाइश है हर हिंदू की शुद्र तो अछूत था और अछूत ही होना चाहिए डर लगता है अब उन धर्म के ठेकेदारों को सावेधनिक जंजीरों का तभी तो कहते है शुद्र भी तो हिंदू था और हिंदू ही होना चाहिए हम बहुजन हैं बहुजन ही हमारा धर्म होना चाइए हमें नहीं जाने दिया मंदिर में सालों साल तुमने कभी भगवान ने आकर नहीं कहा मंदिर में इन्हें भी आने देना चाहिए हम मंदिर में घुसे हैं संविधान की बदौलत हमारा मकसद पूजा का नहीं आत्म स्वाभिमानी होना चाहिए हम बहुजन हैं बहुजन ही हमारा धर्म होना चाइए रखा गया शिक्षा से वंचित हमे साक्षी तो भगवान को ही होना चाहिए वो नहीं है शिक्षा भी मिली हमे संविधान बदौलत संविधान तो हर बहुजन के घर में होना ही चाहिए पूज लेते भगवान को हम अगर हमे कुछ दिया होता अब तो पूजा बाबासाहेब की ही होनी चाहिए हम बहुजन हैं बहुजन ही हमारा धर्म होना चाइए