बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

कौन कहता है साहेब बेटियों मे हुनर नही होता है
इन्हें हुनर दिखाने का मौका ही कहा दिया जाता है
जन्म होते ही बेटी को या तो मार दिया जाता है
या बेटी के अधिकारों को दबा दिया जाता है
पढ़ना चाहती है लाड़ों भी मगर उन्हें पढ़ने कहा दिया जाता है
थामानी थी हाथो में किताबें मगर किताबें कहा बेटी के हाथों में
गोबर का टब थमा दिया जाता है
कौन कहता है साहेब बेटियों मे हुनर नही होता
 इन्हें मोका ही कहॉ दिया जाता है
पैदा ही नही होने देते साहेब इन्हें तो कोख मे ही मरवा दिया जाता है
कौन कहता है साहेब बेटियों में हुनर नही होता है
जिस जिस बाप ने बेटी को अपनाया है हर उस बेटी ने हुनर दिखाया है
मौका मिला पढ़ने का तो बेटी ने हुनर दिखाया है आईएस आईपीएस सीएम पीएम
बेटी ने बनकर दिखाया है कैसी भी हो हालत बेटी की प्रक्रति का विधान चलाया है
पली बढ़ी हो कही भी लाड़ों पर ग़ैरों को अपनाया है
बिछड़ के अपने मात पिता से घर ग़ैरों का चमन बनाया है
फिर देखो जालिमों ने क्यों बेटी को तड़फया है
विकास हुआ भ्रमाण्ड का यारों जब जब बेटी ने हुनर दिखाया है
रामरत्न सुडा लिखे यारों बेटी ने वंश चलाया है
कितनी भी हो विपदाएँ हँसके गले लगाया है लुटती रही पिटती रही है
साहेब लाड़ों ना दर्द किसी को सुनाया है
हतास नही हो मात पिता इसी वजह से हर दर्द को अपने सिने मे दफ़नाया है
कौन कहता है साहेब बेटियों मे हुनर नही होता है
दिखा पाए अपना हुनर लाड़ों ये मौका कहा मिल पाया है
जब जब मिला मौका लाड़ों को तब तब परचम लहराया है
सेना हो ,शिक्षा हो ,लाडो ने सिका जमाया है
जब मौका मिला बराबर का बेटी ने हुनर दिखाया है


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