आख़ीर क्यों गुंज रहा है भारत जय भीम के नारों से

दोस्तों आजकल हम सुनते है हर जग्ह या यूँ कहें पूरे भारत मे बस एक ही लहर एक आवाज़ बड़े ज़ोरों से  हमें सुनने को मिलती है “ जय भीम जय भीम जय भारत ’’अम्बेडकर मिसन आख़ीर है क्या यै अम्बेडकर मिसन हर चेहरे को सोचने पर मजबूर कर देनेवाला ये शब्द जब कानों मे सूनाई देता जय भीम जय भीम ओर हमारे माथे पर लकीरें आजाति है की आख़ीर क्यों पढ़े लिखे  युआ  नीला झण्डा लेकर जय भीम के नाम पे अपना सब कुछ लूटाने को तैयार होजाते है या यूँ कहें वो इस नीले झण्डे तले अपने प्राणो को न्यौछावर कर देना चाहते है एक पढ़ा लिखा यूआ आख़ीर क्यों इस जय भीम के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देना चाहता है ।यह बहुत ही चिंतनीय विषय है ओर इस जय भीम अम्बेडकर मीसन को समझना अोर जानना हर इन्सान को ज़रूरी है ,आख़ीर क्यों इन कुछ सालों मे देश का भाग्य विधाता कहलाया जाने वाला युआ वर्ग माताएँ बहने ओर यहांतक की बच्चे भी जय भीम जय भीम करते नज़र आ रहे है क्या देश अंधकार या यू कहें देश बर्बादी की ओर जारहा है ,जी नही आज का युआ माताएँ बहने ओर बच्चे शिक्षा की ओर अगर सर है ओर मेरे देश ओर समाज का बहुत बड़ा वर्ग अपने हक़ ओर अधिकारो को जान गया है और यह भी जान गया है की यह सब किसकी बदौलत है इसके पीछे खुन पसीना बहाने वाला कोन है ,और अपने देश के पवित्र ग्रंथ भारतीय संविधान के सम्मान मे तत्पर खड़ा है इसी वजह से पूरा भारत वंश उस महान सक्सयत के नारों यानि जय भीम जय भारत के नाम से गूँज रहा है दोस्तों यह वो नाम है जिसने भारत की सम्पूर्ण नारी व बहुजन समाज मे जन्मे तमाम नागरिकों को सम्मानता पूर्वक जिने ओर एक समान शिक्षा का अधिकार दिया भारत को धर्म निरपेक्ष संविधान ओर  देस मे समता समानता ओर भाईचारा बनाए रखने कि प्रेरणा दी भारत को समता मुलक बनाने मे अपना पुरा जीवन समर्पित कर दिया यहाँ तक की अपने चार चार बच्चों को क़ुर्बान कर दिया वो है डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर जिनका नाम आज देश का हर पढ़ा लिखा युआ हो बच्चा हो महिला हो बुजुर्ग बड़े ही सम्मान से लेता है ओर गर्व महसूस करता है आज समाज कि सूत्र धार कही जाने वाली महिलाओं मे से कुछ महिलाएँ ओर पूरूष बाबा साहेब पर अभद्र टिप्पणियां करते है ओर अपने आपको शक्षित बताते हैं मेरे ख़्याल से उन्हें शिक्षित कहना उचित नहीं होगा जो लोग एक एसे योद्धा जिसे भारत भाग्य विधाता कहा जाता है जिन्होंने भारत माता केलिए निस्वार्थ भावना से अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया उस भारत भाग्य विधाता पुजनिय बाबा साहेब के बारेमें अभद्र बोलरहे हो  एसी महीलाऐं या पुरूष पढ़े लिखे हो सकते है पर शिक्षीत नहीं इन्हें शिक्षीत  न कहकर पढ़े लिखे कहना उचित होगा क्यों की एक दूसरी तिसरी कॉलांस मे पढ़ने वाला बच्चा पढ़ लिख रहा है पर वह शिक्षीत नहीं है मेरे ख़्याल से ऐसे लोग जो बाबा साहेब पर ग़लत शब्दो का इस्तेमाल करते है वो या तो किसी पाखण्डी साजिस मे उलझे हुए है या वो १९४७ से पहले की परीस्थियो से अनजान है भारत को शान्ति प्रिय विश्व गुरू एक एसा देस जिसमें कोइ बेरोज़गार न हो कोइ बच्चा भूख से ना मरे कीसी असाहाय का शोषण ना हो किसी अबला की आबरू ना लूटी जाए जिसमें सम्पूर्ण नारी अपने आपको सुरक्षित महसूस करे जिसमें मजहब से पहले इन्सानियत विद्धयमान हो ऐसे भारत का निर्माण करने ओर प्रत्यक नागरिक को प्रेरित कर एक एसा भारत जिसमें ना कोई जाति मायने रखती हो ओर ना ही कोई धर्म मायने रखता हो सब इन्सान खुशहाल रहे  ‘यह है अम्बेडकर मिसन, जो विश्व केलिए प्रेरणा बने ,
मेरे शब्दों से कीसी की भावनाओं को ठेस पहुँची हो तो माफ़ी चाहता हू बल्कि यह सच्चाई है  जय भीम जय भारत  निला सलाम
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                                                                                                 रामरत्न सुड्डा 

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