Mahobbat shayeri

आखिर किस से करे महोब्बत

 महोब्बत करना कोई गुनाह नहीं ये तो खुदा का दिया अनमोल तोहफा है 

मगरमहोब्बत करें तो आखिर करें किस्से आज के इस दौर में हुस्न वालो के लिए मोहब्बत तो बस जिस्म फिरौती का मोका है

कैसे खिले गुल महोब्बत में

कैसे खिले गुल महोब्बतों में महोब्बते भी तो दिलों से नहीं जिस्मों से होने लगीं हैं कोन देखता है दिल का 

अच्छा या बुरा अब जो महोब्बत हुस्न देखकर होने लगी है, 

कैसे खिले गुल महोब्बतों में महोब्बते भी तो दिलों से नहीं जिस्मों से होने लगीं हैं

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