मंदिर पूजा पाठ आस्था ओर सच्चि भग्ति कि राह

कूछ समय पहले की बात है मैं किसी काम से  बाहर सहर मे  रहा करता था मे मेरा कमरा जहा पर था वो एरीया पंखा सर्किल के नाम  से जाना जाता था मै छूट्टी के दीन ट्रेन से घर आता ओर ट्रेन से ही वापस शहर वापस जाया करता था पंखा सर्किल से रेलवे स्टेशन काफि दूर था छुट्टी के दिन घर आना जाना करता तो मुझे पैदल ही आना जाना होता था क्यों की घरवाले पैसे काम चलाऊ हि देते थे क्यों की मेरे घरवाले आर्थिक रूपसे ज्यादा धनी नही थे तो मै उनसे ज्यादा पैसे लेता भी नही था दोतीन महिने पैदल आते जाते रहने से मेरी मुलाकात महावीर नाम के एक व्यक्ति से हूई महावीर का खूदका एक ओटो गैराज था ओर वो वहिपर रहता था महावीर बीकानेर का रहने वाला था कूछ दीन आते जाते रहने से मेरी महावीर से अच्छी खासी दोसती होगई थी मै एक दो दीन से फुर्सत मिलती तो  महावीर से मिलने अक्सर गैराज चला जाता महावीर एक सच्चा आस्तिक था वो हर रोज सूबहा साम नहा धोकर मंत्र उचारण करता ओर पक्षियों को दाना पानी डालता ओर माथे से तीलक तो कभी मिटने नही देता मै नास्तिक था मै कभी अंधविश्वास पूजा पाठ मंत्र संत्र को नही मानता ओर महावीर ये सब जानता था की मै नास्तिक हू फिरभी हमदोनों मे गहरा लगाव था साएद इसलिए की हमारे धार्मिक विचार भले ही अलग थे लेकीन ईन्सानयत दोनो मे थी महावीर धर्म आस्था पूजा पाठ तो करता था लेकीन धर्म से पहले ईन्सानयत को मानता था उसकी नजर मे सभी धर्म समान थे उसके दील मे सभी जीव जगत के लिए प्यार था चाहे वो किसी भी धर्म को मानने वाला धार्मिक आदमी हो या कोई ओर जीव हो सभी के प्रती दया भाव दील मे  सभी केलिए सम्मान था शुरूआत  कूछ दीनों मे मूझे लगता था की महावीर कितना समझदार ओर मेहनती है ओर खुद ही कर्म प्रधान बताता है ओर अंधविश्वास मै भरोसा रखता है एक दीन मैने महावीर से पूछलीया की आप कितने समझदार है फिरभी पत्थर के आगे  धूपब्ती करते है मंत्र पढते है पाखण्ड करते है एसा क्यो तो महावीर ने मूझे बताया हम  ईन्सानयत को सर्वोपरि समझते है लेकीन संसार मे सभीलोग हमारे जैसे नही है कूछ लोग भगवान आत्मा परमात्मा भूत प्रेतात्मा के डर से बूरे काम नही करते ओर अगर एसे लोगों के दिलो दीमाग मे एसा माहोल रहना जरूरी है नही तो ऐसे लोग जो भग्वान आत्मा परमात्मा के भय से घिनोने काम नही करते वो इनसान पारधी हो जाएगा ओर अपराध बजाएगा  ओर ईसी लिए मै ये पाखण्डी काम करता हू येतो मै भी जानता हू ओर मै एसे लोगो मे ही ज्यादा दिलचस्पी रखता हू जो पाखण्ड मे कम ओर ईन्सानयत मे ज्यादा विश्वास रखते हो मूझे महावीर की बातो मे बहोत कूछ सिखने को मिला साएद मै नही समझ पाता पर महावीर की बातो से मूझे समझ आया की हर ईन्सान पाख्णङी नही होता कूछ लोग ङर भय बनाने के लिए पाखण्ड करते है कूछ लोग देश व समाज के हित के लिए तो कूछ पाख्णङ के सहारे अपनी रोटीया सेकने के लिए पर महावीर की बातो ने ये साबित कर दिया ईन्सान मे ही भग्वान है इन्सान बनो भग्वान खूद ब खू द मीलजाएगा


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