अगर कोई भगवान(देवता)किसी इंसान को उसके अस्तित्व को नकारने या उसकी पूजा पाठ नकरने पर उसमे आस्था न रखने पर किसी को कोई नुकसान पहुंचाए तो उसे भगवान(देवता) नहीं मेरे ख्याल से उसे तानाशाह कहना उचित होगा ओर किसी भी इंसान के लिए किसी तानाशाह की गुलामी और यातनाएं सहकर सो साल जीवन जीने की अपक्षा की बजाए मेरे ख्याल से उस तानाशाह की बगावत कर संघर्ष मय जीवन के कुछ पल जीना ही उन सो सलो से हजारों गुना ज्यादा बेहतर सिद्ध होंगे
आस्था एक अंध गुलामी है जो इंसान को अपनी अदृश्य चार दिवारी के अंदर बंधक बनाकर रखती है और उस चारदीवारी को फांदना बड़े जिगर वाले भगतसिंह और बाबासाहेब डॉक्टर अंबेडकर जैसे महान विद्वानों का काम हैं फुजदिलो का नहीं
आस्तिक इंसान अंदर से कमजोर होते है उनके अंदर महज कल्पनाओं की बगावत करने का भी दम नहीं होता है
क्योंकि आस्था एक काल्पनिक विचार है और भगवान का नाम उस काल्पनिक दुनिया का द्वार है
अगर पूजा पाठ किसी इश्वर की भगति करने से अगर कष्टों का निवारण संभव है तो 99%लोग आस्तिक है चाहे वो किसी भी धर्म और समुदाय से हो वो अपने कुल के अनुरूप आस्था रखते है वोभी सच्चे दिल ओर लग्न से तो फिर 99.99%लोग दुखी क्यों
सभी के जीवन में सुख चैन अमन और शांति क्यों नहीं
इसे भगवान का लेख या भवन की करणी कहकर टालना उचित नहीं होगा ओर अगर आप इस दुख के कारण को भगवान का लेख या करणी कहकर टालते हो तो आपको मेरी नीचे लिखी बातों का जवाब देना होगा अगर कोई महज12 महीने की बच्ची के दुष्कर्म का सीकर होना किसी मासूम को पैदा होते ही गटर का नसीब होना नादान उम्र में ही किसी मासूम बच्चे का किसी हादसे या गंभीर बीमारी का सीकर होना किसी मासूमों के पैदा होते ही उनके सर से माता पिता का साया छीन जाना किसी बूढ़े मां पाप की आंखो के सामने उनका इकलौता सहारा छीन जाना भी तो फिर उसी इश्वर का लेख होगा अगर ये सब उस सर्वशक्तिमान ईश्वर के लिखे लेख से ही होता है
ओर अगर सभी इंसानों उसी विधाता के लेख के अनुसार ही जीवन मिलता है और उसी की लिखी विधि अनुरूप ही सभी को चलना है तो एक चोर को किसी इंसान द्वारा चोरी की सजा देना तो इश्वर का अपमान होगा
एक डॉक्टर द्वारा किसी बीमार चोटिल इंसान का सही इलाज कर उसे मरने से बचा लेना किसी साइंटिस्ट द्वारा किसी बीमारी का इलाज खोजकर उस बीमारी को खत्म करना भी इश्वर के लेख के साथ खिलवाड़ करना होगा अगर आपके धर्म ग्रंथो को सही माने तो सबसे ज्यादा तो पाप के भागी तो डॉक्टर और वैज्ञानिक होगे जो उस विधाता के लेख को बदले की पुरजोर कोशिश करते है अब आप इस बात को ये कहकर सही साबित करना उचित नहीं होगा की खुद इश्वर ने ही डॉक्टर को इस कार्य के लिए बनाया है विधि में खुद विधाता ने उसके लिए ये कार्य लिखा है तो आपको नीचे लिखे इस तथ्य का भी जवाब देना होगा
एक सीकारी किसी निर्दोष अनबोल जीव को मारकर खाता है तो आप और आपका भगवान उससे संवर्ग और नर्क का चयन नहीं कर सकते क्योंकि आपके धर्म ग्रंथो के अनुसार सभी इंसानों की किस्मत और कार्य सब विधाता का लेख है जिसके लिए विधाता ने जो लिख दिया उसे वैसा ही आचरण करना पड़ेगा तो आपका सर्वशक्तिमान ईश्वर उसे किसी जुर्म का दोषी कसे ठहराएगा उन सभी गलत कामों का दोषी सवये तुम्हारा इश्वर है क्योंकि एक अपराधी के जीवन में अपराध खुद तुम्हारे इश्वर ने लिखे है किसी मंदिर में हुए किसी ओरत या बच्ची के बलात्कार का जिम्मेवार खुद तुम्हारा इश्वर है और मंदिर के स्थान का लेखन तुम्हारे इश्वर ने किया है वो भी किसी मासूम की जिंदगी से खेलने के लिए किसी आह्वान को सारण देने के लिए सभी इंसानों के कर्म तुम्हारे उसी सर्वशक्तिमान ईश्वर ने लिखे है
ओर आपका सर्वशक्तिमान ईश्वर ही संसार के सभी दुखों और अपराधो का कारण है
ओर एक अपराधी की पूजा अर्चना करना मूर्खता है
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