स्वाभिमान कि लङाई


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अब मत रूको साहेब ये अपने हक ओर स्वाभिमान कि लङाई  है 
तूम कुर्सी पाकर भूल गए सायद तूम्हारी कूर्सी कि खातिर बाबा साहेब ने चार चार संतानें खोई है 
तूम भूल गये सायद माता रमा बाई भी तुम्हें सरताज बनाने कि खातिर खून के आंसू रोईं है पढलो तूम इतिहास खोल क्यो तूम्हारी मन  कि आँखे  सोई है
तेरा सानो सोकत से रहना सहना मन मर्जी से पढना लिखना सब बाबा साहेब की दूहाई है, तूम करो पठ चाहे गीता का चाहे पूजो पत्थर मूरत को तूम मत भूलो उस महामानव को जो बदल गए तेरी सूरत को 
ना धन कि जिसने आस रखी ना एसी रूमो मे सोया था देख तेरी वो बुरी हालत को  खून के आंसू रोया था ,बनाने को हूक्मरान तुम्हें  वो ना दिन रातों को सोया था
पाकर नोकरी संविधान बदोलत आज तोङ रहे सविंधान जो दूश्मन  क्यों सविंधान बचाना भूल गया  
खूब  लूटवाया धन दोलत तुमने कभी मन्दिर मे कभी पाखण्डी बाबाओं के ङेरो मे, अब चोर है आते नजर जो तूमको भीम राव के सेरो मे ,आज वो अच्छे लगते है दूश्मन तुमको कभी जो नीच बोलकर रखाकरै थे अपने पैरों  में 
रामरत्तन सूङा मिटा दिया क्यो भीम राव के सपनो को ,बाबा साहेब के दिए सब सूख भोग क्यो गले लगा लिया दूश्मन को
चार पैसे क्या लिए कमा जो भूल गया तू अपनो को, अरे हटा अपने सर से अब उस पाखण्ड की परछाई को ,ओर चल उस राही बाबा भीम ने दिखलाई जो
खतरे मे है तेरी आजादी अधिकार तेरे सब लूट रहे होता तुम्हें एहसास नहीं  क्यो नींद तुम्हें जो आई है 
तू चेतेगा भी कैसे से मूर्ख तेरे सर पे तो अंधविश्वास की परछाई है
अब मत रूको साहेब ये अपने हक ओर स्वाभिमान कि लङाई  है 

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