मेरे कूछ दर्दनाक पल
उन दीनों की बात है जब मै बारहवी कक्षा में पढा करता था मेरी क्लास के ही रमेस नामके लङके से दोस्ती होगंइ रमेस पढाई लिखाई मे बहोत ही होशियार था रमेस दो बहनो के बीच रमेस ईक्लोता भाई था रमेस के माता पिता एकदम सान्त स्वभाव के व दिल के धनी व्यक्तित्व वाले थे रमेस के जिद्द करने पर अक्सर मै रमेस के साथ उनके घर चला जाता था दो-चार बार आने जाने ओर रमेस के माता पिता को भी मुझसे लगाव सा होगया था ओर मूझे भी उनसे बाते करना बहोत अच्छा लगता रमेस पढाई लिखाई के साथ खेती बाडी के कामकाज मे माता पिता का हाथ भी बटाता रमेस के माता पिता रमेस की बहनों कमला बोला से घर का या खेती बाडी का कोई काम नही करवाते कमला बिमाला भी पढाई लिखाई मे रमेस से कोई कम नही थी इसीलिए रमेस भी यही चाहता था की कमला बिमला बस पढाई लिखाई करे ओर कोई काम न करे रमेस का परीवार आर्थिक रूप से कमजोर था क्योकि रमेस के घर मे बस खेती बाडी के अलावा और कोई आर्थिक विकल्प नही था ओर खेती बाडी मे इतनी अच्छी पैदा भी नहीं हो ती थी साथ में तीन तीन बहन भाई यो के पढाई लिखाई का खर्च लेकीन रमेस के माता पिता कूछ भी करके रमेस को ओर कमला बिमला को कामयाब बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने मे कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते थे रमेस क्लास मे हमेशा फस्ट आता ओर मै सबसे लास्ट मै लास्ट आता तो मेरी क्लास के ओर लडके मेरे बारे मे कूछ उलटा सिधा बोलकर रमेश को चीङाते मेरे बारे एसा वैसा सुनकर रमेश को गुस्सा तो बहुत आता पर करता भी क्या ये तो सच था मै था ही निकम्मा एक दीन रमेश ने तग आकर मुझे सब कह सुनाया क्लास के ओर लडके तेरे बारे मे क्या क्या भला बुरा कहकर मूझे चीङाते रहते है मैने सोचा साएद अब रमेश मुझ से ज्यादा दीन दोस्ती नही रखेगा मै पढाई लिखाई में कमजोर हू ओर रमेश होशियार जो है रमेश अब कीसी क्लास के खुद के जैसे होशियार लङके से दोस्ती करेगा लेकीन रमेश नै मूझसे दोस्ती तोङने के बजाए मूझे पढाई लिखाई पर ध्यान देने के लिए दबाव बनाने लगा ओर मै रमेश के साथ रहने केलिए कूछ भी करने को तैयार था अब रमेश मूझे सवाल समझता ओर अपने साथ ही पढने को बोलता रमेश के बताए हर सवाल मेरे दीमाग मे कम्पयूटर की तरहां फीड हो जाते ओर मेरा पढने को मन भी करता कूछ दीनों बाद हमारा मासिक टैस्ट लीया गया तो उसमें रमेश फस्ट ओर मै क्लास में सेकेण्ड नम्बर पर आया क्लास के सभी लङके लड़कियो यहा तक की गुरूजनों तक अफसोस होगया की एक सबसे कमजोर लङका अचानक से इतना होशियार कैसे होगया जब स्कूल प्रबंधक को ये बात पता चली तो रमेश को मासिक वेतन पर स्कूल के ओर बच्चों को पढाने तक का ओफर कर दीया अब मेरा भी पढाई मे पूरा मन लगने लगा था ओर मासिक टैस्ट में कभी फस्ट तो कभी सेकेण्ड आता मूझे अब लगने लगा था मै भी कामयाब हो जाऊंगा, मूझे अब पढने मे मजा आने लगा था जब हमारे फाइनल अग्जाम का रिजल्ट आया तो क्लास मे रमेश फस्ट ओर मै सेकेण्ड आया मै खुसी से झूमने लेकिन जब मैने देखा तो मुझे रमेश कही दिखाइ नही दीया मूझे रमेश पर गुस्सा आने लगा रमेश रिजल्ट सुनने जो नही आया मै मन ही मन मे रमेश पर गुस्सा होरहा था ओर साथ ही मन मे विचार कर रहा था आज रमेश रिजल्ट सुनने आता तो कितना अच्छा होता दोनो दोस्त खूब ईज्वाय करते एसे विचार करते करतें मै वापस घर पहुँच गया दो तीन दीन बाद मे मैने रमेश के घर जाकर रमेश से मिलने का विचार कर मै रमेश के घर चलागया रमेश हतास उदास सा सामने ही खटिया पर बढ कूछ चिंतन कर रहा था मै जैसे ही रमेश के पास गया रमेश की आँखे नम होगंइ ओर मूझे अपनी कतर निगाहों से देखता हूआ रो कर मेरे गले लग गया क इ बार तक गले मिलते रहे ओर फीर मै ओर रमेश उसी खटिया पर बैठ गए मै रमेश ने जो मूझे योगदान दीया मै उसका आभार व्यक्त करता रहा लेकीन रमेस कूछ भी ज्वाब नही दे रहा था तो मैने रमेश को कूछ एसा वैसा कहदीया लेकीन रमेश नै अपने मूह से एक भी लफ्ज़ नही निकाला मै नही जान पाया था की रमेश की आखीर परेसानी क्या है कूछ देर बद मैने रमेश से अंकल के बारे मे पूछा तो रमेश फूट फूट कर रोने लगा जब रमेस को रोते देखा तो मेरे मन मे बूरे बूरे विचार आने लगे ओर मै डर सा गया ओर बाद मे पता चला मेरे दीमाग मे जो विचार आए कूछ एसा ही होगया रमेश के पिताजी की किसी लम्बी बीमारी ने जान ले ली रमेश का सर से सहारा छीनगया मेरा दोस्त लाचार हो चूका था मै भी उसकी कूछ मदद करता तो मै भी बेरोजगार था मैने रमेश को दिलासा दीया आपकी पढाई हम रूकने नही देंगे एक ना एक दीन अंकल के सपने को साकार करने का फैसला कर मै घर आगया ओर अगले कूछ पैसे घरवालों से लेकर ओर कूछ साल इधर उधर से फीस जूटाकर रमेश का एडमिन बीए मे ओर मैने आई टी आई मे दाखिला ले लीया रमेश पास ही के सहर मे बीए करने लगा ओर मै दूर के सहर मे आई टी आई करने लगा हम दोनो ने आपसी सहयोग से डिग्री ले ली अब रमेश बीएड करना चाहता था ओर मेरी भी यही ख्वाईश थी की रमेश टीचर बने ओर मेरी तरहां ओर बच्चों का भी जीवन सँवारे कूछ समय बाद मेरा कीसी लिमिटेड कम्पनी मे ज्वाईन होगया ओर मै रमेश से बीएड की फिस ओर पूरा खर्च उठाने का वादा कर कम्पनी ज्वाइन करने चला गया कम्पनी मे मूझे एकदम आराम दायक काम मिला ओर उसकी देन रमेश था बस अब मेरा लक्ष्य रमेश को टीचर बना था उसने मेरी जिंदगी तो सवार दी अब मै भी उसकी जीन्दगी को स्वार देना चहता था दो तीन महीने काम करने के बाद बस मूझे बीएड के फार्म निकलने का इन्तजार था जैसे ही फार्म निकले मै कम्पनी से तन्ख्वाह लेकर जल्द से छुट्टी लेकर रमेश के घर की ओर निकल गया रमेस के घर पहूंचा तो देखा रमेश के घर मातम पसरा था रमेश की किसी एक्सीडेंट मे मोत हो चुकी थी मूझे पता चलते ही मेरा सरीर एकदम सून सा पड गया ओर मै बेहोश होकर जमिन पे गीर गया कूछ लोगों ने मूझे होस्पिटल पहूंचा या मूझे होस आया तो मै खुद को संभालते हुए वापस रमेस के घर चला गया वहां कूछ लोग क्लेम का जिक्र कररहेथे तो रमेश की माने साफ मना कर दीया रमेश की मोत के पैसे लेने से लोगों के लाख समझाने पर भी रमेस की माने पैसे लेने से हानही की उस मंजर के बाद मैने भी कम्पनी छोङदी मेरा दिल बहोत हतास हो चूका था क्योकी मेरी जिंदगी को सवारने वाला मेरा दोस्त इस दूनियाँ मे नही रहा मैने भविष्य की नही सोची ओर कम्पनी को रिजाइन देदीया कम्पनी ने मूझे बहोत खत भेजे आ जाओ अभी भी हम आपको फिर से ज्वाइन करने को त्यार है क्योकी रमेस ने मेरे दीमाग मे कम्पयूटर की तरहां ङाङा फीड करने की ताकत को जगा दीया था लेकीन मैने कम्पनी के ओफर को नही स्वीकारा ओर कम्सापनी मे जाने से साफ इन्कार कर दीया आज मै खूूूदको माफ नही कर पाया मै रमेश का मै जिन्दगीं भर नही चूका सक्ता रमेश की दोनो बहने सादी के लायक होगंइ ओर सादी की त्यारीया होगंइ पर मै बेरोजगार कमला बिमला की सादी मे दैहिक सहयोग अलावा एक रूपए का भी आर्थिक सहयोग नही कर पा रहा रमेश की आत्मा मूझे कोस रही होगी की मूझे कम्पनी नही छोडनी चाहिए थी कमला बिमला की सादी मे मूझे रमेश की कमी का एहसास ही नही होने देना था

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Please do not enter any spm link in comment box